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Dictatorship of sports federation in India

  राष्ट्रीय खेल महासंघ द्वारा खेल को अपनी जागीर समझना भारतीय खेलों के लिए और खिलाड़ियों के लिए नुकसानदायक होने वाला है,  खेल संघ और महासंघ हमेशा खिलाड़ी और प्रशिक्षकों पर दबाव बनाते हैं कि सिर्फ उनके द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं में ही खेलना अनिवार्य है, और हर बात पर सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त होने का फायदा उठाते हैं, सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त होना क्या खेल उनकी जागीर हो जाती है? जैसे सरकारी स्कूल होते हैं वैसे ही प्राइवेट स्कूल भी होते हैं और हर जगह प्राइवेट ट्यूशन और कोचिंग सेंटर भी होते हैं, सरकार किसी भी खेल संघों को मान्यता देती है उस खेल की प्रतियोगिताओं का आयोजन करके राष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों का चयन किया जाए और उन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सम्मिलित करने भेजा जाए, इसका मतलब यह कदापि नहीं है कि खेल पूर्णता एसोसिएशन वालों की जागीर हो जाता है, इनके मनमानी कारोबार के चलते खिलाड़ियों का बहुत नुकसान होरहा है, ऐसा ही उदाहरण भारतीय रोलर स्केटिंग महासंघ और उनके द्वारा मान्यता प्राप्त राज्य संघ के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी, रोलर स्केटिंग खेल भारत में चतुर्थ श्रे...