Sports commercialization
माननीय प्रधानमंत्री जी को नमस्कार
भारतीय खेल जगत के विकास के लिए मैंने एक कंपनी का गठन किया और जीएसटी के माध्यम से देश के विकास में हा खेलों में कमर्शियल लेवल पर जब भारतीय खेलों को लाया जाएगा तब खिलाड़ी और प्रशिक्षकों का आर्थिक और सामाजिक विकास निश्चित तौर पर होगा इसी कारण हम बड़े स्तर पर कार्य कर भारत में खेल के माध्यम से टूरिज्म और कमर्शियल एक्टिविटी में टैक्सेशन का योगदान बढ़ाने के तरफ जा रहे थे।
परंतु भारतीय खेल जगत में इतना काला अंधेरा है की शब्दों में बयां करना भी हमारे लिए मुश्किल हो गया है।
भारतीय रोलर स्केटिंग महासंघ 1955 से भारत में बतौर राष्ट्रीय महासंघ कार्य कर रहा है,
फिर भी स्पीड स्केटिंग विश्व प्रतियोगिताओं में भारत का एक भी पदक आज तक नहीं जितवा पाया है
और इनका कहना है कि भारत में सिर्फ हम ही को मान्यता है और हमारे सिवा कोई भी रोलर स्केटिंग खेल का प्रसार प्रचार नहीं कर सकता है,
इसके चलते बहुत सारी ओपन प्रमोशनल प्रतियोगिता हमें थाईलैंड और इंडोनेशिया में लेनी पड़ी
जिन प्रतियोगिताओं में वर्ष 2019 और जनवरी फरवरी 2020।
हजारों खिलाड़ियों ने दूसरे देशों से आकर वहां हिस्सा लिया और भारत देश को मिलने वाला टूरिज्म थाईलैंड और इंडोनेशिया को मिला।
इसका कारण सिर्फ महासंघ के पदाधिकारियों का स्वार्थी स्वभाव
भारत की बहुत सारी राज्य संगठन को यह बदलना चाहते है जो पिछले 30 वर्षों से इस फेडरेशन के साथ जुड़कर कार्य कर रहे हैं
क्यों कि इन्हें अपनी कुर्सी बचाने के लिए अपने ही लोग हर राज्य संगठन में रखने जरूरी है ताकि इनकी तानाशाही चलते रहे.
जो भी व्यक्ति देश में रोलर स्केटिंग खेल के प्रतियोगिता आयोजित करता है उसे रोकना और जो खिलाड़ी और कोच एस ऐसी प्रतियोगिता में खेलकर अनुभव लेना चाहते हैं उनको अपने फेसबुक और दूसरे सोशल मीडिया के द्वारा डराया धमकाया जाता है कि अगर आपने ऐसी प्रतियोगिता में शामिल हुए तो आपके ऊपर बैन लगाया जाएगा और उसके पश्चात आप रोलर स्केटिंग की कोई भी प्रतियोगिता नहीं खेल पाओगे।
ऐसी निचले स्तर की मानसिकता वाले लोग इस महासंघ में पदाधिकारी है और वह पूर्णता अपनी तानाशाही और खेल को अपनी मक्तेदारी समझ रहे है,
इसके चलते हमारे जैसे प्राइवेट कार्य करने वाली कंपनी जो पूर्णता रोलर स्केटिंग खेल पर ही निर्भर है अपने कार्य को भारत में समेटकर कंपनी को दूसरे देशों में शुरू करने का एक ही विकल्प बचता है।
पिछले 6 वर्षों में रोलर स्केटिंग को गति देने के लिए हमने बहुत सारे प्रयास किए 28 लाख ₹80000 का कैश प्राइज इवेंट 2018 में भी हमने पुणे में आयोजित किया था जिसका नाम था आय एफ एस IFS PUNE.
ऐसी प्रतियोगिताओं को भी राष्ट्रीय स्तर की फेडरेशन रोकना चाहती थी क्योंकि वह इतने बड़े कैश प्राइज वाला इवेंट कभी नहीं ले सकते हैं और ना ही कभी लिया है।
माननीय प्रधानमंत्री जी खेल के माध्यम से भी देश को बहुत सारा आर्थिक फायदा हो सकता है
और भारत में स्पोर्ट्स कोड लाना बहुत जरूरी है
खेल के प्रति नीतियां कितनी भी विकसित की गई या अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर भी प्रदान किया गया तब भी इस तरह के खेल संगठन खेलों को अपनी जागीर समझते हैं और देश की उन्नति में बाधा निर्माण करते हैं
ऐसी फेडरेशन में काम करने वाले लोग व इनके राज्य संगठन में पदाधिकारी जो है वह हर जगह पर अपने ही प्रशिक्षक भेजकर वहां उपकरण मनचाही कीमत पर बेचकर करोड़ों अरबों रुपए सालाना
कमाते हैं और किसी प्रकार का टैक्स भी नहीं भरते हैं,
और वहां पहले से काम कर रहे गरीब कोचेस को वहां से यह कहकर निकलवा ते हैं कि हम ही लोग रोलर स्केटिंग की राज्य और राष्ट्रीय संगठन से जुड़े हुए हैं।
रोलर स्केटिंग खेल में दो दो तीन तीन लाख रुपए तक के इक्विपमेंट्स बेचे जाते हैं और उनके बिल भी नहीं मिलते हैं
25000 ₹50000 की बेरिंग 20000 से ₹30000 के अच्छी क्वालिटी के विल्स.
और सालाना 100000 से ₹200000 की ट्रेनिंग फीस
कोलंबिया और यूरोप के दूसरे देशों में ट्रेनिंग के लिए हजारों खिलाड़ी भारत से जाते हैं और उनके ट्रेनिंग में भी 50% कमीशन होता है,
सैकड़ों खिलाड़ी हर साल इंटरनेशनल टूर्नामेंट और एशियन गेम वर्ल्ड गेम के नाम पर बाहर भेजे जाते हैं और उनसे 200000 से ₹500000 तक वसूले जाते हैं
और उन पैसों का भी कोई हिसाब होता नहीं है
रजिस्ट्रेशन के नाम पर भारत में 50000 खिलाड़ियों से 200 से ₹500 लिए जाते हैं
ट्रेनिंग फीस और टूर्नामेंट फीस के नाम पर करोड़ों रुपए वसूलने वाली यह महासंघ पिछले 60 सालों में भारत को एक भी अंतरराष्ट्रीय ट्रैक नहीं दे पाई है,
यह बहुत ही गंभीर विषय है इस विषय पर आपका हस्तक्षेप अत्यंत आवश्यक है
पूर्व SPORTS MINISTER
श्री राज्यवर्धन जी राठौड़ यह सब चीजें जानते थे इसीलिए उन्होंने एक वीडियो बनाया था जिसमें कहा गया था कि स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया में से अथॉरिटी शब्द हटाना जरूरी है क्योंकि स्पोर्ट्स में किसी भी तरह की अथॉरिटी होने की जरूरत नहीं है।
पर शायद उनकी कही हुई बात मौजूदा सिस्टम को समझ में नहीं आ रही है,
कृपया इस राष्ट्रीय खेल फेडरेशन की पूर्णता जांच हो और दोषियों पर उचित कार्रवाई हो ताकि खेल विकास में बाधा उत्पन्न करने वाले लोग दूर रहे और खेल के साथ ही देश विकास भी हो।
जय हिंद जय भारत
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